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Friday, January 3, 2014

बच्चों के लिए आठ हिन्दी पहेलियां... (विवेक रस्तोगी)

विशेष नोट : हर साल की तरह छुट्टियों में बच्चे दिल्ली आए हुए हैं, और उन्हें कुछ नया सिखाने के लिए आठ पहेलियां उन्हें सिखा रहा हूं... सो, आप लोग भी पढ़िए, और पसंद आएं तो अपने बाल-गोपालों को भी सिखाइए...

- बाल पहेली एक -
जब भी लिखना होता तुमको, बनती हूं मैं सखी-सहेली...
यही है मेरा गुण रे भाई, जब भी काटो, नई-नवेली...

- बाल पहेली दो -
दुश्मन का आना बुरा, जाना भला जनाब...
लेकिन क्या है, जिसका आना-जाना दोनों खराब...

- बाल पहेली तीन -
अगर नाक पर चढ़ जाऊं, कान पकड़कर तुम्हें पढ़ाऊं...

- बाल पहेली चार -
काला घोड़ा, सफेद सवारी... एक उतरा, तो दूसरे की बारी...

- बाल पहेली पांच -
धूप देख, मैं आ जाऊं, छांव देखकर शर्माऊं...
जब भी आए हवा का झोंका, साथ उसी के उड़ जाऊं...

- बाल पहेली छह -
एक राजा की अनूठी रानी, दुम के सहारे पीती पानी...

- बाल पहेली सात -
दो-दो हैं सुंदर बच्चे, दोनों का है एक ही रंग...
अगर एक भी बिछड़ गया, दूजा काम न आएगा...

- बाल पहेली आठ -
जब तक रहती हूं मैं सीधी, सबको खूब पिलाती पानी...
अगर मुझे तुम उल्टा कर दो, मैं गरीब हो जाऊंगी...


Monday, April 12, 2010

बाल पहेलियां (पशु-पक्षी)... (विवेक रस्तोगी)

विशेष नोट : अपने एक स्कूली दोस्त संदीप गोयल (चार्टर्ड एकाउंटेंट) की फरमाइश पर उसके बच्चों के लिए कभी कुछ पहेलियां मैंने भी लिखी थीं... आज अचानक पुराने मेल देख रहा था, सो, याद आ गईं, और आप लोगों के सामने ले आया हूं... इस पोस्ट की पहेलियों के उत्तर इसी पोस्ट के अंत में देखें...

1.
चार पांव हैं, एक पूंछ है, अक्सर रहती मौन...
सुबह-शाम मैं दूध पिलाती, बतलाओ मैं कौन...

2.
जंगल का राजा कहलाता, सब हैं डरते मुझसे...
बोलो तुम मैं कौन हूं, वरना, खा जाऊंगा झट से...

3.
सुबह-शाम मैं बोझ उठाता, ढेंचूं-ढेंचूं करता हूं...
पीछे मत तुम आना मेरे, मार दुलत्ती भगता हूं...

4.
सबसे वजनी होता हूं मैं, इस धरती पर औरों से...
सूंड से पानी हूं पीता, चिंघाड़ मारता ज़ोरों से...

5.
मिर्ची खाता, सब दोहराता, प्यार सभी का पाता हूं...
हरे बदन पर लाल चोंच है, सबका मन हर्षाता हूं... 


Wednesday, April 7, 2010

बाल पहेलियां (पशु-पक्षी)... (दीनदयाल शर्मा)

विशेष नोट : बच्चों को सिखाने के लिए सदा कुछ नया ढूंढता रहता हूं, सो, अचानक श्री दीनदयाल शर्मा द्वारा लिखित ये पहेलियां मिलीं... डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू.कविताकोश.ओआरजी (www.kavitakosh.org) के अनुसार श्री शर्मा का जन्म 15 जुलाई, 1956 को राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में स्थित नोहर तहसील के जसाना गांव में हुआ था... श्री शर्मा 'लंकेश्वर', 'महाप्रयाग', 'दिनेश्वर' आदि उपनामों से लेखन करते रहे हैं, तथा हिन्दी और राजस्थानी भाषाओं में शिशु-कविता और बाल-काव्य के क्षेत्र में जाना-पहचाना नाम हैं... इस पोस्ट की पहेलियों के उत्तर इसी पोस्ट के अंत में देखें...

1.जंगल में हो या पिंजरे में,
रौब सदा दिखलाता,
मांसाहारी भोजन जिसका,
वनराजा कहलाता...

2.गोल-गोल हैं जिसकी आंखें,
भाता नहीं उजाला,
दिन में सोता रहता हरदम,
रात विचरने वाला...

3.हमने देखा अजब अचम्भा,
पैर हैं जैसे कोई खम्भा,
थुलथुल काया, बड़े हैं कान,
सूंड इसकी होती पहचान...

4.सरस्वती की सफ़ेद सवारी,
मोती जिनको भाते,,
करते अलग दूध से पानी,
बोलो कौन कहाते...

5.कान बड़े हैं, काया छोटी,
कोमल-कोमल बाल,
चौकस इतना पकड़ सके न,
बड़ी तेज़ है चाल...

6.राग सुरीली रंग से काली,
सबके मन को भाती,
बैठ पेड़ की डाली पर जो,
मीठे गीत सुनाती...

7.सुबह-सवेरे घर की छत पर,
करता कांव-कांव,
काले रंग में रंगा है पंछी,
मिलता गांव-गांव...

8.कुकडूं-कूं जो बोला करता,
सबको सुबह जगाता,
सर पर लाल कलंगी वाला,
गांव घड़ी कहलाता...

9.नर पंछी नारी से सुन्दर,
वर्षा में नाच दिखाता,
मनमोहक कृष्ण को प्यारा,
राष्ट्र पक्षी कहलाता...

10.हरी ड्रेस और लाल चोंच है,
रटना जिसका काम,
कुतर-कुतरकर फल खाता है,
लेता हरि का नाम...

11.गले में कम्बल, पीठ पर थुथनी,
रखती है थन चार,
दूध, घी और देती बछड़ा,
करते हम सब प्यार...

12.बोझा ढोता है जो दिन भर,
करता नहीं पुकार,
मालिक दो होते हैं जिसके,
धोबी और कुम्हार...

13.चोरों पर जो झपटा करता,
घर का है रखवाला,
इसकी भौं-भौं से डर जाता,
चाहे हो दिलवाला...

14.लम्बी गर्दन, पीठ पर कूबड़,
घड़ों पानी पी जाए,
टीलों पर जो सरपट दौड़े,
मरुथल जहाज़ कहाए...

15.तांगा, बग्घी, रथ चलाते,
मन करे तो हिनहिनाते,
चने चाव से खाते हैं,
खड़े-खड़े सो जाते हैं...

16.टर्र-टर्र जो टर्राते हैं,
जैसे गीत सुनाते,
जब ये जल में तैरा करते,
पग पतवार बनाते...

17.चर-चर करती, शोर मचाती,
पेड़ों पर चढ़ जाती,
काली पत्तियां तीन पीठ पर,
कुतर-कुतर फल खाती...

18.छोटे तन में गांठ लगी है,
करे जो दिन भर काम,
आपस में जो हिलमिल रहती,
नहीं करती आराम...

19.पानी में ख़ुश रहता हरदम,
धीमी जिसकी चाल,
ख़तरा पाकर सिमट जाए झट,
बन जाता खुद ढाल...

20.छत से लटकी मिल जाती है,
छह पग वाली नार,
बुने लार से मलमल जैसे,
कपड़े जालीदार...


बाल पहेलियां (वस्तु-व्यक्ति)... (दीनदयाल शर्मा)

विशेष नोट : बच्चों को सिखाने के लिए सदा कुछ नया ढूंढता रहता हूं, सो, अचानक श्री दीनदयाल शर्मा द्वारा लिखित ये पहेलियां मिलीं... डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू.कविताकोश.ओआरजी (www.kavitakosh.org) के अनुसार श्री शर्मा का जन्म 15 जुलाई, 1956 को राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में स्थित नोहर तहसील के जसाना गांव में हुआ था... श्री शर्मा 'लंकेश्वर', 'महाप्रयाग', 'दिनेश्वर' आदि उपनामों से लेखन करते रहे हैं, तथा हिन्दी और राजस्थानी भाषाओं में शिशु-कविता और बाल-काव्य के क्षेत्र में जाना-पहचाना नाम हैं... इस पोस्ट की पहेलियों के उत्तर इसी पोस्ट के अंत में देखें...

1.
मंदिर, मस्जिद, गिरजा, गुरुद्वारा,
सभी जगह सम्मान यह पाए,
पतली सी है काया जिसकी,
जलती हुई महक फैलाए...

2.
अलग-अलग रहती हैं दोनों,
नाम एक-सा प्यारा,
एक महक फैलाए जग में,
दूजी करे उजियारा...

3.
दिन-रात मैं चलती रहती,
न लेती थकने का नाम,
जब भी पूछो समय बताती,
देती बढ़ने का पैगाम...

4.
जैसे हो तुम दिखोगे वैसे,
मेरे भीतर झांको,
झट से दे दो उत्तर इसका,
खुद को कम न आंको...

5.
तमिलनाडु, दक्षिण भारत के,
वैज्ञानिक ने किया कमाल,
अग्नि और पृथ्वी मिसाइल,
जिनकी देखो ठोस मिसाल...