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Wednesday, December 24, 2008

अमीर खुसरो की पहेलियां... (दो-सुखन)

विशेष नोट : बचपन में नानी के घर पर ये पहेलियां भी हमसे पूछी जाती थीं... कुछ ही याद थीं, लेकिन अब इंटरनेट से ढूंढ़कर कई 'दो सुखन' पहेलियां डाल रहा हूं... 'सुखन' फारसी भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ कथन या उक्ति है... अमीर खुसरो के 'दो सुखन' में दो कथनों या उक्तियों का एक ही उत्तर होता है... इसका मूल आधार एक ही शब्द के दो-दो अर्थ हैं...

अगर आप जवाब ढूंढ लेते हैं तो ठीक, वरना कमेंट लिख दीजिएगा, मैं जवाब आपको मेल के जरिये भेज दूंगा...

दीवार टूटी क्यों...?
राहगीर लुटा क्यों...?


जोगी भगा क्यों...?
ढोलकी चुपी क्यों...?

गोश्त खाया न क्यों...?
डोम गाया न क्यों...?

मुसाफिर प्यासा क्यों...?
गधा उदासा क्यों...?

रोटी जली क्यों...?
घोड़ा अड़ा क्यों...?
पान सड़ा क्यों...?

सितार बजा न क्यों...?
औरत नहाई न क्यों...?

घर अंधियारा क्यों...?
फकीर बिगड़ा क्यों...?

अनार चखा न क्यों...?
वज़ीर रखा न क्यों...?

दही जमा न क्यों...?
नौकर रखा न क्यों...?

समोसा खाया न क्यों...?
जूता पहना न क्यों...?

पंडित नहाया न क्यों...?
धोबन पिटी क्यों...?


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