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Thursday, January 9, 2014

आइए खेलें, 'हनोई की मीनार' या 'ब्रह्मा की मीनार'... (Let's play the Tower of Hanoi...)

'हनोई की मीनार' या 'ब्रह्मा की मीनार' एक गणितीय खेल या पहेली है, जिसे 'टॉवर ऑफ हनोई' (Tower of Hanoi), 'टॉवर ऑफ ब्रह्मा' (Tower of Brahma) या 'ल्यूकस टॉवर' (Lucas' Tower) भी कहा जाता है... इंटरनेट पर इस पहेली या खेल के बारे में अंग्रेज़ी में बहुत-सी जानकारी उपलब्ध है, लेकिन हिन्दी में कहीं भी विस्तार से कुछ नहीं मिला, सो, मैंने सोचा, क्यों न आपने पाठकों के लिए इस बेहद रोचक और मज़ेदार खेल के बारे में एक पोस्ट डाल दी जाए... वैसे, इंटरनेट पर इसे 'हनोई का टॉवर (Tower of Hanoi), 'ब्रह्मा का टॉवर' (Tower of Brahma) या 'लुकास टॉवर' (Lucas' Tower) के नाम से भी खोजा सकता है...


'ब्रह्मा की मीनार' (Tower of Brahma) को तीन सलाखों और अलग-अलग आकार की कुछ चपटी गोटियों (कैरम बोर्ड जैसी गोटियों) से खेला जाता है, जिन्हें सलाखों में पिरोया जा सके... पहेली की शुरुआत किसी भी एक सलाख पर सभी गोटियों को एक-दूसरे के ऊपर बढ़ते क्रम में लगाकर की जाती है (यानि सबसे छोटी गोटी सबसे ऊपर), ताकि शंकु (Cone) की आकृति मिल सके... पहेली का उद्देश्य है, सभी गोटियों को उसी आकार में अंतिम सलाख तक ले जाना, जिसके लिए कुछ शर्तों का पालन करना ज़रूरी है...
  • एक बार में सिर्फ एक गोटी को स्थानांतरित किया जा सकता है...
  • हर चाल में किसी भी सलाख से सबसे ऊपर मौजूद सिर्फ एक गोटी को हिलाया जा सकता है, और उसे किसी भी अन्य सलाख पर सबसे ऊपर ही रखा जा सकता है...
  • किसी भी समय किसी भी गोटी को खुद से छोटे आकार की गोटी के ऊपर नहीं रखा जा सकता...
यदि आप पहेली को तीन गोटियों के साथ शुरू करते हैं, तो जीतने के लिए पहेली को सिर्फ सात चालों में खत्म करना होगा... इसी तरह यदि गोटियों की संख्या चार है, तो जीतने के लिए अधिकतम चालों की संख्या 15 होगी... यानि हर बार अधिकतम चालों की संख्या '(2 की घात n) - 1' ही रहेगी, जहां n का अर्थ गोटियों की संख्या है... 


वैसे, सलाखों और अलग-अलग आकार की गोटियां जुटाने का तामझाम काफी मुश्किल साबित हो सकता है, सो, आप लोगों की जानकारी के लिए बता देना चाहूंगा कि मैंने अलग-अलग आकार के चार ढक्कनों (बोतलों के ढक्कन) से यह खेल खुद भी खेला, और अपने बच्चों को भी सिखाया... अब तो मेरे दोनों बच्चे - सार्थक और निष्ठा - भी 15 चालों में चार ढक्कनों से बनी 'ब्रह्मा की मीनार' (Tower of Brahma) को हल कर लेते हैं... और हां, इसमें सलाखों की भी ज़रूरत नहीं पड़ी... सो, इसी तरह की मिलती-जुलती चीज़ों से आप भी इसे तैयार कर सकते हैं, और खेल सकते हैं... यकीन मानिए, बहुत आनंद आएगा...

10 जनवरी का अपडेट : कल रात को थर्मोकोल के टुकड़ों से काट-काटकर बच्चों को 'हनोई का टॉवर' बनाकर दिया, जिसमें उनकी पेंसिलों ने सलाखों का काम किया... दोनों कल रात से बहुत खुश हैं... और आज सुबह पांच गोटियों वाले 'हनोई के टॉवर' को 31 चालों में पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं... देखिए कल रात की तस्वीर...